बुधवार, 1 जुलाई 2020

"वानर" यानि वन में रहने वाले



आदिकवि वाल्मीकि दयावान जी द्वारा रचित रामायण में आर्य अनार्य संस्कृतियों की भरमार है। वाल्मीकि कलम ने उस समय के द्रविड़,नागवंशी, भील आदि समुदाय के अनेकों महत्वपूर्ण पहलुओं को छुआ है। जिन्हें आधुनिक रामायण में तोड़ मरोड़ पेश किया गया। उन्हीं में से एक है "वानर"

वानर नाम आते ही इसका अर्थ सीधा बंदर या बंदर के मुंह वाले इंसानों से लिया जाता है जो कि गलत है। वाल्मीकि रामायण में ऐसा कुछ नहीं। वाल्मीकि रामायण में "वनचरिण:" शब्द का प्रयोग किया गया है जिसका अर्थ है वन में विचरण करने वाले मतलब वानर। वानर इस लिए भी कहा गया क्योंकि इस समुदाय के लोग जंगल के माहौल में ढलने के लिए बंदर जैसा मुकुट और पूंछ लगाते थे । कुछ विशेष लोग रीछ का मुकुट भी लगाते थे।

वानर समुदाय बहुत ही बुद्धिमान, राजनीतिज्ञ,बलवान व वैज्ञानिक था। जिसकी अद्धभुत मिसाल थे किश्किन्दा राज्य के सम्राट वीर बाली जिनका कत्ल राजा रामचंद्र द्वारा छल कपट नीति से उनके ही भाई सुग्रीव की मिलीभगत से किया गया।

वीर विक्की देवान्तक
आदि धर्म समाज
आधस भारत

3 टिप्‍पणियां:

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